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देश की एक धरोहर है . खो सी रही है कही. किताबो मै सिमट कर ना रह जाऊ कही मुझसे वो कह रही . पूछना चाहती हू पूछना चाहती हू मैं आप से क्या जानते हो नाम मेरा . छुप गई मेरी पहचान कभी देश की थी मुझसे भी पहचान चाहती हू मैं वही मान भुजों तो मेरा नाम तभी तो दिलवा पोओगे फिर से वही पहचान
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