back
user
हरिद्वार से पुष्कर आकर पूजनीय माता जी का पिंडदान कर्म किया। यह रीति आत्मा के ब्रह्मलीन होने का मार्ग मानी जाती है। इस कर्म के पूर्ण होने से मेरे अंतर्मन में भी एक अलौकिक शांति आई। पूजनीय माता जी की स्मृतियां अब निराकार जल के समान आंखों में बनी रहेंगी।
user
Replying to @gssjodhpur
0/400