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मेरा तो सपना था खुद का एक घर हो जहां चाय की चुस्की लेते सकूं के कुछ पल हो न बहुत ख्वाहिशें थी शुरू से मेरी न झुठी उम्मीद का कोई जाल हो मगर तुम ने दिला कर के मकान। अरमान सारे मार दिये खाली कर इस दिल को तुम इस जहां को खनडर बना गये
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