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*** इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में :: दुवाये बेसुमार अमोघ वरदानो की भरमार है :: कोई पढ़ के अपनी राय बताये नहीं इतना कोई दिलदार है $ कहते है समय नहीं पढ़ने का बात करने का ( फ़ोन से भी नहीं ) :: कहाँ खो गया अपनापन / अपणायत :: मार्किट में अनमोल हीरे मोती गहनों की भरमार है $ अपणायत कही दिखने सुनने को भी मिल जाये तो बता देना भाई :: उसे पावन गंगा जल की तरह दिल में सहेज कर रखूँगा :: अमूल्य उपहार है %%%
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