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ना अपनों की सीमा है ना परायो से दूरी है ना अपणायत को खोजना कोई मजबूरी है :: बहुत आगे बढ़ गयी है दुनिया :: किसे फुरसत है कि अपणायत में समय जाया करे :: व्हाट्स एप्प पर इधर का उधर मेसेज भेजने में व्यस्त है सभी :: किसी को कहाँ समय कुछ पढ़ भी तो ले ऐसी भी क्या मजबूरी है % दिन में चिराग लेकर खोजता हूँ कहीं तो अपणायत देखने को मिले :: महकते सुन्दर चित्रों की भरमार है इलेक्ट्रॉनिक ***
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