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देश की अखंडता संप्रभुता और राष्ट्रीय अस्मिता पर प्रहार करना देश के कर्णधारों के लिए सब जायज है लोकतंत्र में क्या यही अभिव्यक्ति की आजादी है कि कुर्सी के लिए देश हित नहीं पार्टी हित सर्वोपरि। प्रश्न बहुतेरे । आम जन आहत हैं इस प्रकार के वक्तव्य से क्या मां भारती का अपमान नहीं है।
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